आजमगढ़।रामायणकालीन संस्कृति, भूगोल, नदियों तथा अस्त्र-शस्त्रों की ऐतिहासिक विरासत को दस्तावेजबद्ध कर संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसी क्रम में रामायण सर्किट के चेयरमैन एवं संस्कृति विभाग, भारत सरकार से जुड़े डॉ. राम अवतार शर्मा के आजमगढ़ आगमन पर महराजगंज क्षेत्र के हूंसेपुर ग्राम में श्रीराम आगमन स्थल समितियों एवं मूल सरयू बचाओ अभियान की संयुक्त बैठक लोक दायित्व के आह्वान पर आयोजित हुई।
बैठक में डॉ. शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय श्रीराम संग्रहालय की प्रस्तावित योजना पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीराम से संबंधित स्थलों, परंपराओं, नदियों, संस्कृति और ऐतिहासिक सामग्री को केवल आस्था के स्तर पर नहीं, बल्कि प्रामाणिक अभिलेखीकरण, शोध और आधुनिक तकनीक के माध्यम से संरक्षित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि आजमगढ़ को दो महत्वपूर्ण दायित्व दिए गए हैं—रामायणकालीन नदियों का अभिलेखीकरण तथा रामायणकालीन अस्त्र-शस्त्रों का अभिलेखीकरण। इन दोनों विषयों पर डॉ. पवन कुमार के नेतृत्व में कार्य किया जा रहा है, जिसमें जनपद के अनेक शोधकर्ता एवं स्थानीय लोग भी सहभागिता कर रहे हैं।
मूल सरयू और रामायणकालीन नदियों पर भी चर्चा
बैठक में मूल सरयू के संरक्षण एवं पुनर्जीवन से जुड़े विषयों पर भी गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि नदियां केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और धार्मिक स्मृति की महत्वपूर्ण वाहक रही हैं। इसलिए रामायणकालीन नदियों की पहचान, उनके प्राचीन प्रवाह, उद्गम, संगम, तटवर्ती स्थलों और वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
महराजगंज स्थित भैरव बाबा क्षेत्र में विकास कार्यों तथा वहां एक संग्रहालय विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। प्रस्तावित संग्रहालय को स्थानीय इतिहास, धार्मिक परंपरा और रामायणकालीन सांस्कृतिक संदर्भों से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हुई
डॉ. शर्मा के आजमगढ़ प्रवास के दौरान शहर में भी दो बैठकें आयोजित की गईं। पहली बैठक आलोक कुमार के संयोजन में ACCI के प्रांगण में हुई, जबकि दूसरी बैठक सिधारी स्थित दीनानाथ जी के आवास पर संपन्न हुई।
बैठकों में रामायणकालीन नदियां, रामायणकालीन संस्कृति, प्राचीन भूगोल, अस्त्र-शस्त्र तथा श्रीराम से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों के अभिलेखीकरण और संरक्षण पर व्यापक चर्चा हुई। इस दौरान स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक सामग्री को एकत्र करने और शोध के लिए व्यवस्थित करने पर भी जोर दिया गया।
बैठकों में सदानंद सिंह, सुरेंद्र सिंह, अजय श्रीवास्तव, सीताराम प्रजापति, सुभाष चंद्र जायसवाल, डॉ. पवन कुमार, अरविंद जी, शशि प्रकाश राय, अशोक अग्रवाल, गौरव रघुवंशी, संतोष, अंकुर, राघवेंद्र मिश्रा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे
डॉ. राम अवतार शर्मा के आगमन को स्थानीय स्तर पर रामायणकालीन विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से नदियों और अस्त्र-शस्त्रों के अभिलेखीकरण की जिम्मेदारी मिलने से आजमगढ़ के लिए शोध और सांस्कृतिक संरक्षण के नए अवसर खुलने की संभावना है।
बैठकों में इस बात पर भी जोर दिया गया कि श्रीराम से जुड़ी विरासत को केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि इतिहास, पुरातत्व, भूगोल, पर्यावरण, लोकस्मृति और सांस्कृतिक अध्ययन के समन्वित दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।